Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को सुबह 6:20 से पहले भगवान की पूजा करना क्यों है जरूरी? सूतक काल से पहले जान लें नियम और शुभ मुहूर्त
3 मार्च 2026, मंगलवार को साल का पहला और विशेष चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। माना जा रहा है कि यह लंबे समय तक प्रभाव डालने वाला ग्रहण होगा और भारत में भी इसका पूर्ण प्रभाव रहेगा। ऐसे में भक्तों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या ग्रहण के दिन भगवान की पूजा नहीं की जा सकती? और अगर सूतक काल बहुत सुबह से शुरू हो रहा है, तो पूजा का सही समय क्या होगा?
क्या चंद्र ग्रहण के दिन पूजा वर्जित है?
Chandra Grahan 3 मार्च 2026 को लग रहा है।
“ऐसा बिल्कुल नहीं है कि चंद्र ग्रहण के दिन भगवान की पूजा नहीं की जा सकती। हां, सूतक काल के कारण पूजा का समय बदल जाता है। सूतक से पहले और ग्रहण समाप्त होने के बाद विधिवत पूजा की जा सकती है।”
क्योंकि सूतक काल सुबह बहुत जल्दी आरंभ हो जाएगा, इसलिए भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में ही पूजा संपन्न करनी होगी।
चंद्र ग्रहण से पहले पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:05 बजे से 5:55 बजे तक
- उषा काल: 5:55 बजे से लगभग 6:15 बजे तक
- सूतक काल प्रारंभ: सुबह 6:20 बजे के आसपास
अर्थात भक्तों को 6:20 बजे से पहले पूजा, आरती और भोग अर्पण कर लेना चाहिए।
विशेष रूप से जिनके घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, वे ब्रह्म मुहूर्त में ठाकुर जी को उठाकर दूध और हल्का भोग अर्पित कर सकते हैं। ध्यान रहे कि सूतक शुरू होने से पहले भोग हटा लें।
पंडित जी के अनुसार, सूतक काल में भगवान के समीप केवल तुलसी दल रखना चाहिए, भोजन नहीं।
चंद्र ग्रहण से पहले पूजा के नियम
यदि आप 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण से पहले पूजा कर रहे हैं, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें:
- घर और मंदिर के मुख्य द्वार पर गेरू लगाएं — इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता।
- भगवान के पास तुलसी दल अवश्य रखें।
- मंदिर में कुशा घास रखें — इसे अत्यंत पवित्र माना गया है।
- ग्रहण के दिन भगवान को सुबह स्नान कराने के स्थान पर सीधे भोग लगा सकते हैं।
- यदि दिया जला रहे हैं, तो सूतक लगने से पहले उसे उचित स्थान पर सुरक्षित कर दें।
- सूतक काल में मंदिर के पट बंद रखें और अंधकार रखें।
सूतक काल में क्या न करें?
- पूजा-पाठ न करें
- मंदिर के पट न खोलें
- भगवान के पास भोजन न रखें
- शुभ कार्य प्रारंभ न करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक काल में देवताओं को कष्ट होता है, इसलिए शांति और नियम पालन आवश्यक है।
ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?
ग्रहण समाप्ति के बाद:
- स्वयं स्नान करें
- घर और मंदिर की शुद्धि करें
- भगवान को स्नान कराएं
- ताजे वस्त्र पहनाएं
- विधिवत पूजा और आरती करें
- भोग अर्पित करें
- दान-पुण्य करें (विशेष फलदायी माना जाता है)
चंद्र ग्रहण 2026 का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह आत्मचिंतन, साधना और मंत्र जाप के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है। हालांकि सूतक के दौरान पूजा वर्जित होती है, लेकिन मंत्र जाप और ध्यान मन ही मन किया जा सकता है।
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निष्कर्ष
3 मार्च 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण के दिन भक्तों को पूरे दिन पूजा से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। महत्वपूर्ण यह है कि सुबह 6:20 बजे से पहले, विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में पूजा संपन्न कर ली जाए। सूतक काल के नियमों का पालन करते हुए और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धि करके पुनः नियमित पूजा आरंभ की जा सकती है।
सही जानकारी और समय का ध्यान रखकर आप इस दिन भी धार्मिक आचरण शांति और श्रद्धा के साथ कर सकते हैं।
