हिन्दू पंचांग के अनुसार संक्रान्ति वह खगोलीय क्षण होता है जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। प्रत्येक संक्रान्ति का धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। विशेष रूप से मकर संक्रान्ति, मेष संक्रान्ति (सौर नववर्ष) और कन्या संक्रान्ति (विश्वकर्मा पूजा) भारत के विभिन्न भागों में बड़े उत्सव के रूप में मनाई जाती हैं।
यहाँ वर्ष 2026 (1947–1948 शक संवत) की सभी प्रमुख संक्रान्तियों की तिथियाँ, दिन और समय नई दिल्ली (भारत) के स्थानीय समयानुसार दिए गए हैं।
2026 की संक्रान्ति तिथियाँ और समय
| संक्रान्ति | तिथि | वार | विशेष नाम | समय |
|---|---|---|---|---|
| मकर संक्रान्ति | 14 जनवरी 2026 | बुधवार | मकर संक्रान्ति, पोंगल | 03:13 PM |
| कुम्भ संक्रान्ति | 13 फरवरी 2026 | शुक्रवार | कुम्भ संक्रान्ति | 04:14 AM |
| मीन संक्रान्ति | 15 मार्च 2026 | रविवार | मीन संक्रान्ति | 01:08 AM |
| मेष संक्रान्ति | 14 अप्रैल 2026 | मंगलवार | सोलर नववर्ष | 09:38 AM |
| वृषभ संक्रान्ति | 15 मई 2026 | शुक्रवार | वृषभ संक्रान्ति | 06:28 AM |
| मिथुन संक्रान्ति | 15 जून 2026 | सोमवार | मिथुन संक्रान्ति | 12:59 PM |
| कर्क संक्रान्ति | 16 जुलाई 2026 | बृहस्पतिवार | कर्क संक्रान्ति | 11:45 PM |
| सिंह संक्रान्ति | 17 अगस्त 2026 | सोमवार | सिंह संक्रान्ति | 08:04 AM |
| कन्या संक्रान्ति | 17 सितम्बर 2026 | बृहस्पतिवार | विश्वकर्मा पूजा | 07:58 AM |
| तुला संक्रान्ति | 17 अक्टूबर 2026 | शनिवार | तुला संक्रान्ति | 07:57 PM |
| वृश्चिक संक्रान्ति | 16 नवम्बर 2026 | सोमवार | वृश्चिक संक्रान्ति | 07:48 PM |
| धनु संक्रान्ति | 16 दिसम्बर 2026 | बुधवार | धनु संक्रान्ति | 10:29 AM |
संक्रान्ति का धार्मिक महत्व
- मकर संक्रान्ति: सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व, दान–पुण्य और स्नान का विशेष महत्व
- मेष संक्रान्ति: सौर पंचांग के अनुसार नववर्ष की शुरुआत
- कन्या संक्रान्ति: कई क्षेत्रों में विश्वकर्मा पूजा के रूप में मनाई जाती है
- अन्य संक्रान्तियाँ भी दान, जप, हवन और सूर्य उपासना के लिए शुभ मानी जाती हैं
पूजा और दान के सामान्य नियम
- प्रातःकाल स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देना
- तिल, गुड़, चावल, वस्त्र और अन्न का दान
- मंत्र जप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ
- संक्रान्ति काल में सात्विक आहार ग्रहण करना
महत्वपूर्ण टिप्पणी
सभी समय 12-घण्टा प्रारूप में नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समयानुसार दिए गए हैं और डी.एस.टी (यदि लागू हो) के अनुसार समायोजित हैं।
आधी रात के बाद के समय को अगले दिन से संबंधित माना गया है।
पंचांग में दिन की गणना सूर्योदय से सूर्यास्त तक की जाती है।



