वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कालसर्प योग को जन्मकुण्डली में एक अशुभ योग माना गया है। इसी कारण इसे कालसर्प दोष भी कहा जाता है। यह योग व्यक्ति के जीवन में संघर्ष, मानसिक तनाव, विलंब और बाधाओं का कारण बन सकता है।
कालसर्प योग का प्रभाव हर व्यक्ति पर समान नहीं होता, लेकिन इसकी उपस्थिति को ज्योतिष में गंभीरता से देखा जाता है।
कालसर्प योग क्या होता है
जब जन्मकुण्डली में सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य स्थित हों, तब कालसर्प योग का निर्माण होता है।
इस स्थिति में कुण्डली के लगातार पाँच भाव सदैव रिक्त रहते हैं, जो जीवन के कुछ क्षेत्रों में असंतुलन को दर्शाते हैं।
राहु और केतु छाया ग्रह होते हैं, और इनके बीच ग्रहों का फँसना व्यक्ति के कर्मों, भाग्य और मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालता है।
कालसर्प योग बनने की प्रमुख शर्तें
- सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित हों
- राहु–केतु के बाहर कोई भी ग्रह न हो
- कुण्डली में पाँच लगातार भाव खाली हों
- राहु और केतु आमने-सामने (180°) हों
कालसर्प दोष के बारह प्रमुख प्रकार
ज्योतिष शास्त्र में सभी कालसर्प दोषों को बारह श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- अनन्त कालसर्प योग
- कुलिक कालसर्प योग
- वासुकि कालसर्प योग
- शङ्खपाल कालसर्प योग
- पद्म कालसर्प योग
- महापद्म कालसर्प योग
- तक्षक कालसर्प योग
- कर्कोटक कालसर्प योग
- शङ्खचूड़ कालसर्प योग
- घातक कालसर्प योग
- विषधर कालसर्प योग
- शेषनाग कालसर्प योग
हर प्रकार का योग अलग-अलग भावों में राहु-केतु की स्थिति पर आधारित होता है और इसके प्रभाव भी उसी अनुसार बदलते हैं।
आंशिक कालसर्प दोष क्या है
कुछ ज्योतिष विद्वान आंशिक कालसर्प दोष को भी मानते हैं।
इस स्थिति में:
- एक ग्रह को छोड़कर सभी ग्रह राहु और केतु के बीच होते हैं
- दोष का प्रभाव पूर्ण कालसर्प योग से कम माना जाता है
हालाँकि, यह दोष सभी ज्योतिषियों द्वारा व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है, इसलिए इसकी व्याख्या मतभेदों पर आधारित होती है।
कालसर्प योग के संभावित प्रभाव
- जीवन में बार-बार बाधाएँ
- मानसिक अशांति और भय
- कार्यों में अनावश्यक विलंब
- पारिवारिक या वैवाहिक तनाव
- करियर में उतार-चढ़ाव
यह आवश्यक नहीं कि कालसर्प योग वाला व्यक्ति असफल ही हो, लेकिन उसे सफलता के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
कालसर्प योग वैदिक ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। इसका प्रभाव व्यक्ति की कुण्डली, ग्रहों की शक्ति और दशा-अन्तर्दशा पर निर्भर करता है।
इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से सम्पूर्ण कुण्डली विश्लेषण कराना आवश्यक होता है।



