त्रिपुष्कर योग क्या है?
त्रिपुष्कर योग हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष का एक अत्यंत प्रभावशाली योग माना जाता है। “त्रि” का अर्थ है तीन गुना—अर्थात इस योग में किया गया कार्य तीन गुना प्रभाव के साथ फल देता है। यही कारण है कि त्रिपुष्कर योग को लेकर ज्योतिष में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
इस योग में:
- शुभ कार्य करने पर लाभ, सफलता और समृद्धि तीन गुना बढ़ सकती है
- अशुभ या नकारात्मक कार्य करने पर समस्याएं भी बार-बार और कई गुना बढ़ सकती हैं
इसलिए त्रिपुष्कर योग को शक्तिशाली लेकिन संवेदनशील योग माना जाता है।
त्रिपुष्कर योग का ज्योतिषीय महत्व
त्रिपुष्कर योग तब बनता है जब विशेष तिथि, वार और नक्षत्र का दुर्लभ संयोग होता है। इसकी मुख्य विशेषताएं हैं:
- यह योग वर्ष में बहुत कम बार बनता है
- इसमें किए गए कार्यों का प्रभाव दीर्घकाल तक रहता है
- अच्छे कर्म जीवन में स्थिरता और उन्नति लाते हैं
- गलत निर्णय या नकारात्मक कार्य भविष्य में दोहराई जाने वाली समस्याएं पैदा कर सकते हैं
इसी कारण ज्योतिषाचार्य इस योग में नई शुरुआत से पहले विशेष विचार करने की सलाह देते हैं।
त्रिपुष्कर योग 2026: तिथि और समय की पूरी सूची
नीचे वर्ष 2026 में पड़ने वाले सभी त्रिपुष्कर योग के दिन और समय दिए गए हैं:
जनवरी 2026
- 4 जनवरी 2026, रविवार
⏰ 12:29 पी एम से 03:11 पी एम
फरवरी 2026
- 24 फरवरी 2026, मंगलवार
⏰ 06:51 ए एम से 07:01 ए एम - 28 फरवरी 2026, शनिवार
⏰ 06:47 ए एम से 09:35 ए एम
अप्रैल 2026
- 14 अप्रैल 2026, मंगलवार
⏰ 04:06 पी एम से 12:12 ए एम (15 अप्रैल) - 19 अप्रैल 2026, रविवार
⏰ 07:10 ए एम से 10:49 ए एम - 28 अप्रैल 2026, मंगलवार
⏰ 05:43 ए एम से 06:51 पी एम
मई 2026
- 3 मई 2026, रविवार
⏰ 12:49 ए एम से 05:39 ए एम - 3 मई 2026, रविवार
⏰ 05:39 ए एम से 07:10 ए एम
(एक ही दिन में दो बार त्रिपुष्कर योग बनना इसे और अधिक प्रभावशाली बनाता है)
जून 2026
- 16 जून 2026, मंगलवार
⏰ 04:12 पी एम से 12:52 ए एम (17 जून) - 21 जून 2026, रविवार
⏰ 09:31 ए एम से 03:20 पी एम
जुलाई 2026
- 11 जुलाई 2026, शनिवार
⏰ 05:31 ए एम से 11:03 ए एम
अगस्त 2026
- 25 अगस्त 2026, मंगलवार
⏰ 05:55 ए एम से 06:20 ए एम - 29 अगस्त 2026, शनिवार
⏰ 09:56 ए एम से 03:42 ए एम (30 अगस्त)
सितम्बर 2026
- 12 सितम्बर 2026, शनिवार
⏰ 07:46 ए एम से 12:55 पी एम
अक्टूबर 2026
- 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार
⏰ 03:39 पी एम से 04:06 ए एम (28 अक्टूबर) - 31 अक्टूबर 2026, शनिवार
⏰ 04:57 पी एम से 05:39 ए एम (1 नवम्बर)
दिसम्बर 2026
- 29 दिसम्बर 2026, मंगलवार
⏰ 03:43 पी एम से 07:13 ए एम (30 दिसम्बर)
त्रिपुष्कर योग में कौन-से कार्य करने चाहिए?
यदि उद्देश्य शुभ और सकारात्मक हो, तो त्रिपुष्कर योग में निम्न कार्य अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं:
- धार्मिक अनुष्ठान, मंत्र जाप, व्रत
- दान-पुण्य, सेवा और परोपकार
- शिक्षा से जुड़े निर्णय
- दीर्घकालीन निवेश की योजना
- आत्म-विकास और आध्यात्मिक साधना
इन कार्यों से सकारात्मक फल कई गुना बढ़ सकता है।
त्रिपुष्कर योग में क्या नहीं करना चाहिए?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, त्रिपुष्कर योग में निम्न कार्यों से विशेष रूप से बचना चाहिए:
- उधार लेना या देना
- मुकदमा, विवाद या झगड़े की शुरुआत
- नौकरी छोड़ना या बड़ा निर्णय जल्दबाजी में लेना
- नकारात्मक सोच या क्रोध में निर्णय
- रिश्तों में टकराव पैदा करना
मान्यता है कि इस योग में किए गए ऐसे कार्य बार-बार समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
त्रिपुष्कर योग, द्विपुष्कर योग और पुष्कर योग में अंतर
| योग | प्रभाव |
|---|---|
| पुष्कर योग | कार्य का फल कई गुना बढ़ाता है |
| द्विपुष्कर योग | फल दोहराता है (अच्छा या बुरा) |
| त्रिपुष्कर योग | फल तीन गुना या बार-बार देता है |
इसी कारण त्रिपुष्कर योग को सबसे अधिक सावधानी वाला योग माना जाता है।
निष्कर्ष
त्रिपुष्कर योग 2026 एक अत्यंत शक्तिशाली ज्योतिषीय योग है। यह जहां शुभ कर्मों से जीवन में उन्नति और स्थायित्व ला सकता है, वहीं गलत निर्णयों से समस्याओं को भी कई गुना बढ़ा सकता है। इसलिए इस योग में कोई भी कार्य शुरू करने से पहले पंचांग, समय और उद्देश्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
टिप्पणी (महत्वपूर्ण सूचना)
- सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में दर्शाए गए हैं
- समय नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समयानुसार है
- आधी रात के बाद के समय को आगामी दिन से प्रत्यय कर दर्शाया गया है
- पंचांग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और अगले दिन सूर्योदय पर समाप्त होता है





