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बसोड़ा 2026: कब है बसोड़ा, जानें तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और Sheetala Ashtami के खास पकवान

लेखिका: अनिता शर्मा

आमतौर पर लोग बासी खाने को अच्छा नहीं मानते और कई लोग इसे खाने से परहेज भी करते हैं। लेकिन हिंदू परंपरा में एक दिन ऐसा भी आता है जब बासी भोजन का विशेष महत्व होता है। यह दिन है बसोड़ा या शीतला अष्टमी का।

इस दिन Sheetala माता की पूजा की जाती है और घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। एक दिन पहले बनाया गया ठंडा भोजन ही ग्रहण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हैं, क्योंकि यह पर्व मौसम परिवर्तन के समय आता है।

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2026 में बसोड़ा कब है? | कब है शीतला अष्टमी

साल 2026 में शीतला अष्टमी (बसोड़ा)
📍 बुधवार, 11 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।

यह पर्व होली के आठ दिन बाद, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है।


बसोड़ा पूजन का शुभ मुहूर्त (2026)

  • सुबह: 06:35 बजे
  • शाम: 06:27 बजे तक
  • कुल अवधि: लगभग 11 घंटे 52 मिनट

इस दौरान भक्तजन शीतला माता की पूजा कर सकते हैं।


शीतला अष्टमी का महत्व

शीतला माता को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। विशेष रूप से:

  • चेचक
  • खसरा
  • त्वचा संबंधी संक्रमण
  • मौसमी बीमारियाँ

माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से रोगों से मुक्ति और परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा होती है।

🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण

यह समय सर्दी से गर्मी की ओर मौसम बदलने का होता है। ऐसे में स्वच्छता और संतुलित भोजन का विशेष महत्व होता है।
एक दिन पहले बना भोजन ठंडा करके खाने की परंपरा शरीर को तापमान परिवर्तन के अनुकूल ढालने से भी जोड़ी जाती है।


बसोड़ा पर क्यों नहीं जलता चूल्हा?

बसोड़ा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता।

  • एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रख लिया जाता है।
  • उसी भोजन को अगले दिन माता को भोग लगाकर ग्रहण किया जाता है।
  • इसे “बसोड़ा” या “बासोड़ा” कहा जाता है, जिसका अर्थ है बासी भोजन।

कालाष्टमी भी इसी दिन

11 मार्च 2026 को कालाष्टमी भी पड़ रही है।
मान्यता है कि शाम के समय भैरव बाबा के नाम का दीपक जलाने से भय और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।


बसोड़ा पर क्या बनाएं? खास पकवान

बसोड़ा के दिन बनाए जाने वाले व्यंजन एक दिन पहले तैयार किए जाते हैं।

1️⃣ मीठे चावल

गुड़, केसर और सूखे मेवों से तैयार मीठे चावल माता को प्रिय माने जाते हैं।

2️⃣ गुलगुले

गुड़ और आटे से बने गुलगुले शीतला माता को भोग में चढ़ाए जाते हैं।

3️⃣ आलू की सूखी सब्जी

बिना लहसुन-प्याज के जीरे से तड़का लगाकर बनाई जाती है।

4️⃣ सूजी का हलवा

केसर, सूजी, चीनी और ड्राई फ्रूट्स से बना हलवा भी भोग में अर्पित किया जाता है।


पूजा विधि (संक्षेप में)

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  2. पूजा स्थान को साफ करें।
  3. माता शीतला को ठंडा भोग अर्पित करें।
  4. नीम के पत्तों का प्रयोग करें (इन्हें शुद्धता का प्रतीक माना जाता है)।
  5. परिवार के स्वास्थ्य और सुख-शांति की प्रार्थना करें।

बसोड़ा 2026 का संदेश

बसोड़ा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने का संदेश भी देता है।

यह दिन हमें याद दिलाता है कि:

  • परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखें
  • मौसम परिवर्तन में सावधानी बरतें
  • परंपराओं में छिपे वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझें

निष्कर्ष

बसोड़ा 2026 (शीतला अष्टमी) 11 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
यह दिन माता शीतला की कृपा, रोगों से मुक्ति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए विशेष महत्व रखता है।

धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक समझ का यह सुंदर संगम ही बसोड़ा को खास बनाता है।

Harshvardhan Mishra

Harshvardhan Mishra is a tech expert with a B.Tech in IT and a PG Diploma in IoT from CDAC. With 6+ years of Industrial experience, he runs HVM Smart Solutions, offering IT, IoT, and financial services. A passionate UPSC aspirant and researcher, he has deep knowledge of finance, economics, geopolitics, history, and Indian culture. With 11+ years of blogging experience, he creates insightful content on BharatArticles.com, blending tech, history, and culture to inform and empower readers.

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