गुरु पुष्य योग क्या है?
गुरु पुष्य योग को हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष में अत्यंत शुभ और दुर्लभ योग माना जाता है। इसे
गुरु पुष्य नक्षत्र योग, गुरु पुष्य अमृत योग या गुरुपुष्यामृत योग भी कहा जाता है।
यह योग तब बनता है जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग होता है। गुरुवार का संबंध गुरु (बृहस्पति) ग्रह से होता है, जो ज्ञान, धन, धर्म और विस्तार का कारक माना जाता है। वहीं पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों में सबसे शुभ माना गया है।
इसी कारण गुरु पुष्य योग को सर्वसिद्ध योग के समान माना जाता है, जिसमें बिना विशेष मुहूर्त देखे भी कई शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
गुरु पुष्य योग का ज्योतिषीय महत्व
गुरु पुष्य योग का महत्व इसलिए विशेष है क्योंकि:
- पुष्य नक्षत्र में देवी लक्ष्मी का जन्म माना जाता है
- गुरु (बृहस्पति) को सबसे लाभकारी ग्रह माना गया है
- यह योग धन, शिक्षा, व्यापार और स्थायित्व प्रदान करता है
- इसमें किए गए कार्य लंबे समय तक शुभ फल देते हैं
ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, गुरु पुष्य योग में आरंभ किए गए कार्यों में विघ्न-बाधाएं कम आती हैं और सफलता की संभावना अधिक होती है।
गुरु पुष्य योग कैसे निर्मित होता है?
गुरु पुष्य योग के निर्माण के लिए तीन मुख्य तत्व आवश्यक होते हैं:
- वार: गुरुवार (बृहस्पतिवार)
- नक्षत्र: पुष्य नक्षत्र
- ग्रह प्रभाव: बृहस्पति ग्रह की अनुकूल स्थिति
जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार के दिन पड़ता है, तब गुरु पुष्य योग का निर्माण होता है। यह योग शिक्षा, निवेश और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
गुरु पुष्य योग 2026: तिथि और समय
नीचे वर्ष 2026 में पड़ने वाले गुरु पुष्य योग के दिन और समय दिए गए हैं:
अप्रैल 2026
- 23 अप्रैल 2026, बृहस्पतिवार
⏰ 08:57 पी एम से 05:47 ए एम (24 अप्रैल)
मई 2026
- 21 मई 2026, बृहस्पतिवार
⏰ 05:27 ए एम से 02:49 ए एम (22 मई)
जून 2026
- 18 जून 2026, बृहस्पतिवार
⏰ 05:23 ए एम से 11:32 ए एम
गुरु पुष्य योग में कौन-से कार्य करना शुभ होता है?
गुरु पुष्य योग को खरीदारी और नए कार्यों का सर्वोत्तम योग माना जाता है। इस दौरान निम्न कार्य विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:
- शिक्षा आरंभ करना, कोर्स जॉइन करना
- नया व्यापार, दुकान या स्टार्टअप शुरू करना
- नौकरी जॉइन करना या प्रमोशन से जुड़े कार्य
- सोना-चांदी, आभूषण की खरीद
- भूमि, मकान या वाहन खरीदना
- निवेश और दीर्घकालीन योजनाएं
- धार्मिक कार्य, दान-पुण्य, पूजा-पाठ
इस योग में किए गए कार्य स्थिर, लाभकारी और दीर्घकालिक फल प्रदान करते हैं।
गुरु पुष्य योग में क्या सावधानी रखें?
हालांकि यह अत्यंत शुभ योग है, फिर भी कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
- नकारात्मक सोच या क्रोध में निर्णय न लें
- बिना योजना के बड़ा आर्थिक जोखिम न उठाएं
- झूठ, छल या विवाद से बचें
शुद्ध मन और शुभ उद्देश्य के साथ किए गए कार्य ही इस योग का पूर्ण फल देते हैं।
गुरु पुष्य योग और रवि पुष्य योग में अंतर
| योग | वार | विशेषता |
|---|---|---|
| गुरु पुष्य योग | गुरुवार | शिक्षा, धन, व्यापार के लिए श्रेष्ठ |
| रवि पुष्य योग | रविवार | खरीदारी और नए कार्यों के लिए श्रेष्ठ |
| दोनों | — | सर्वसिद्ध और अत्यंत शुभ योग |
निष्कर्ष
गुरु पुष्य योग 2026 वर्ष के सबसे शुभ योगों में से एक है। यह योग विशेष रूप से धन, शिक्षा, व्यापार और स्थायित्व के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यदि आप किसी महत्वपूर्ण कार्य, निवेश या नई शुरुआत की योजना बना रहे हैं, तो गुरु पुष्य योग का समय आपके लिए सर्वोत्तम अवसर हो सकता है।
टिप्पणी (महत्वपूर्ण सूचना)
- सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में दर्शाए गए हैं
- समय नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समयानुसार है
- आधी रात के बाद के समय को आगामी दिन से प्रत्यय कर दर्शाया गया है
- पंचांग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और अगले दिन सूर्योदय पर समाप्त होता है




