सर्दी की कड़ाके की ठंड के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि घरों में लगे पौधों के लिए भी गंभीर समस्या बनता जा रहा है। खासतौर पर तुलसी का पौधा, जिसे लोग बेहद पवित्र और संवेदनशील मानते हैं, प्रदूषण और ठंड का सबसे ज्यादा असर झेल रहा है।
अक्सर लोग तुलसी के पत्तों के काले पड़ने का कारण ठंड, पाला या पानी की कमी मान लेते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि बड़े शहरों में वायु प्रदूषण एक “साइलेंट किलर” की तरह काम करता है। अगर आपकी तुलसी भी पूरी देखभाल के बावजूद मुरझा रही है, तो इसके पीछे की वजह कुछ और हो सकती है।
आइए माली कविता द्वारा बताए गए आसान और असरदार उपायों से समझते हैं कि तुलसी काली क्यों होती है और इससे कैसे बचाव किया जाए।
क्या प्रदूषण भी है तुलसी के काले होने की वजह?
जब पौधे में कोई समस्या आती है, तो सबसे पहले लोग खाद, पानी या धूप की कमी पर ध्यान देते हैं। लेकिन अगर ये सब सही होने के बावजूद तुलसी स्वस्थ नहीं दिख रही, तो इसकी एक बड़ी वजह वायु प्रदूषण हो सकती है।
दिल्ली जैसे शहरों में हवा में मौजूद PM 2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण तुलसी की पत्तियों पर जम जाते हैं।
- ये कण पत्तियों के रोम छिद्र (stomata) बंद कर देते हैं
- इससे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) रुक जाता है
- पौधा अपना भोजन नहीं बना पाता और धीरे-धीरे पत्तियां काली होकर सूखने लगती हैं
तुलसी के पौधे को प्रदूषण और ठंड से कैसे बचाएं?
1. पत्तियों पर नियमित पानी का छिड़काव करें
अगर आपके इलाके में प्रदूषण ज्यादा है, तो हर 2–3 दिन में एक बार तुलसी की पत्तियों पर हल्के पानी का छिड़काव करें।
- इससे पत्तियों पर जमी धूल और जहरीले कण हट जाते हैं
- रोम छिद्र फिर से खुल जाते हैं
⚠️ ध्यान रखें: यह काम सुबह की हल्की धूप में ही करें ताकि पानी ज्यादा देर तक जमा न रहे।
2. हल्दी और लकड़ी की राख का इस्तेमाल करें
अगर प्रदूषण और फंगस की समस्या लगातार बनी हुई है, तो:
- गमले की मिट्टी में 1 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं
- पत्तियों पर हल्की मात्रा में लकड़ी की राख छिड़क दें
हल्दी एंटी-फंगल की तरह काम करती है, जबकि राख एक प्रोटेक्टिव लेयर बनाकर जहरीले कणों को सीधे पत्तियों से चिपकने से रोकती है।
3. पौधे की जगह में करें बदलाव
सर्दियों और प्रदूषण के मौसम में तुलसी को ऐसी जगह रखें:
- जहां 3–4 घंटे की सीधी धूप मिल सके
- बहुत ज्यादा धुंध या जहरीली हवा सीधे न लगे
अगर बाहर प्रदूषण ज्यादा हो, तो रात के समय तुलसी को बालकनी से हटाकर किसी ढके हुए स्थान पर रख दें।
4. लिक्विड खाद का इस्तेमाल करें
प्रदूषण से कमजोर हुए पौधे को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है।
- महीने में 1 बार सीवीड लिक्विड खाद
- या गोबर की खाद का घोल मिट्टी में डालें
इससे पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, पत्तियों में चमक बनी रहती है और वे काली होने से बचती हैं।
तुलसी के काले होने के अन्य कारण
तुलसी के काले पड़ने के पीछे सिर्फ प्रदूषण ही नहीं, बल्कि ये कारण भी हो सकते हैं:
- अत्यधिक ठंड और पाला
- जरूरत से ज्यादा पानी देना (जड़ों का सड़ना)
- मिट्टी में फंगल संक्रमण
- बीज या सूखे फूल समय पर न हटाना
- हवा का सीधा ठंडा झोंका
इन सभी बातों पर ध्यान देकर आप तुलसी को लंबे समय तक हरा-भरा रख सकती हैं।
निष्कर्ष
तुलसी का पौधा बेहद संवेदनशील होता है और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषित इलाकों में उसे अतिरिक्त देखभाल की जरूरत पड़ती है। सिर्फ पानी और धूप ही नहीं, बल्कि प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
अगर आप ऊपर बताए गए आसान गार्डनिंग टिप्स अपनाती हैं, तो आपकी तुलसी फिर से हरी, स्वस्थ और चमकदार हो सकती है।
FAQ
क्या प्रदूषण से तुलसी का पौधा खराब हो सकता है?
जी हां, वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण तुलसी के पत्तों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
प्रदूषण से तुलसी के पौधे को बचाने के लिए क्या करें?
पत्तियों पर पानी का छिड़काव करें, हल्दी और राख का इस्तेमाल करें और पौधे को धूप वाली सुरक्षित जगह पर रखें।




