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Makar Sankranti 2026: आखिर मकर संक्रांति पर क्यों खाई जाती है खिचड़ी?

जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा, धार्मिक कारण और वैज्ञानिक महत्व

मकर संक्रांति 2026: पर्व और तिथि

हर वर्ष की तरह 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में श्रद्धा, उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इसी दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण का आरंभ होता है।

मकर संक्रांति को केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं माना जाता, बल्कि इसे दान, पुण्य, संयम और नए आरंभ का पर्व कहा गया है। यही कारण है कि इस दिन स्नान, दान और विशेष भोजन का अत्यंत महत्व होता है।


मकर संक्रांति और खिचड़ी का गहरा संबंध

उत्तर भारत के कई राज्यों—विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश—में मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना एक प्राचीन परंपरा है।

मकर संक्रांति का नाम आते ही लोगों के मन में खिचड़ी का स्मरण स्वतः हो जाता है। यह परंपरा केवल स्वाद या आदत से नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक आस्था, सामाजिक भावना और व्यावहारिक बुद्धि से जुड़ी मानी जाती है।


बाबा गोरखनाथ से जुड़ी पौराणिक कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा का संबंध योगी बाबा गोरखनाथ से जोड़ा जाता है।

कथाओं में कहा गया है कि एक समय साधु-संतों और योगियों को कठिन परिस्थितियों, आक्रमणों और सीमित संसाधनों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में नियमित और जटिल भोजन बनाना संभव नहीं होता था। तब बाबा गोरखनाथ ने चावल, दाल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाने का सुझाव दिया।

यह भोजन:

  • कम समय में तैयार हो जाता था
  • लंबे समय तक ऊर्जा देता था
  • सरल, सात्विक और पोषणयुक्त था

धीरे-धीरे यह भोजन साधु-संतों से आम समाज तक पहुंचा और मकर संक्रांति से जुड़ गया। तभी से इस दिन खिचड़ी बनाना और ग्रहण करना शुभ माना जाने लगा।


ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश अत्यंत शुभ परिवर्तन माना जाता है। इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है।

खिचड़ी में प्रयुक्त:

  • चावल
  • दाल
  • घी

को सात्विक आहार माना गया है, जो सूर्य को अर्पित करने के लिए उपयुक्त समझा जाता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं, जीवन में स्थिरता आती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इसी कारण स्नान के बाद खिचड़ी का दान कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परंपरा प्रचलित हुई।


स्वास्थ्य की दृष्टि से खिचड़ी क्यों है लाभकारी?

मकर संक्रांति के समय ठंड अपने चरम पर होती है। ऐसे मौसम में खिचड़ी को शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।

खिचड़ी:

  • हल्की और सुपाच्य होती है
  • पाचन तंत्र को मजबूत करती है
  • शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करती है
  • घी के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है

आयुर्वेद के अनुसार, यह भोजन वात और कफ दोष को संतुलित करने में सहायक होता है, जो सर्दियों में आम समस्या होती है।


सामाजिक और मानवीय संदेश

मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, अनाज या सामग्री देने से:

  • सहयोग की भावना बढ़ती है
  • करुणा और सेवा का भाव जागृत होता है
  • समाज में समानता का संदेश जाता है

यही कारण है कि मकर संक्रांति को पुण्य और परोपकार का पर्व कहा जाता है।


निष्कर्ष

मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा केवल एक रिवाज नहीं, बल्कि पौराणिक आस्था, ज्योतिषीय मान्यता, स्वास्थ्य विज्ञान और सामाजिक मूल्यों का सुंदर संगम है।

2026 की मकर संक्रांति हमें यह सिखाती है कि सरलता, संयम और सेवा ही जीवन की सच्ची समृद्धि है।

Harshvardhan Mishra

Harshvardhan Mishra is a tech expert with a B.Tech in IT and a PG Diploma in IoT from CDAC. With 6+ years of Industrial experience, he runs HVM Smart Solutions, offering IT, IoT, and financial services. A passionate UPSC aspirant and researcher, he has deep knowledge of finance, economics, geopolitics, history, and Indian culture. With 11+ years of blogging experience, he creates insightful content on BharatArticles.com, blending tech, history, and culture to inform and empower readers.

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