द्विपुष्कर योग के दिन 2026: द्विपुष्कर योग का समय, महत्व और क्या करें–क्या न करें

द्विपुष्कर योग क्या है?

द्विपुष्कर योग हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष में एक विशेष योग माना जाता है। यह योग तब बनता है जब विशिष्ट तिथि, वार और नक्षत्र का विशेष संयोग होता है। “द्वि” का अर्थ है दो गुना, यानी इस योग में किए गए कार्यों का फल दो बार या कई गुना होकर लौटता है

यही कारण है कि द्विपुष्कर योग को लेकर ज्योतिष में दो तरह की मान्यताएं मिलती हैं:

  • शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है
  • अशुभ या नकारात्मक कार्यों का प्रभाव भी दोहराया जा सकता है

इसलिए इस योग में कार्य करते समय विशेष सावधानी और सही चयन बेहद जरूरी माना जाता है।


द्विपुष्कर योग का ज्योतिषीय महत्व

द्विपुष्कर योग को सामान्य शुभ योगों से अलग माना जाता है, क्योंकि:

  • यह योग हर वर्ष बहुत कम बार बनता है
  • इसमें किए गए कार्यों का प्रभाव दीर्घकाल तक रहता है
  • सकारात्मक कर्म समृद्धि लाते हैं, जबकि नकारात्मक कर्म समस्याएं बढ़ा सकते हैं

इसी कारण ज्योतिषाचार्य इस योग में सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह देते हैं।


द्विपुष्कर योग 2026: तिथि और समय की पूरी सूची

नीचे वर्ष 2026 में पड़ने वाले द्विपुष्कर योग के दिन और समय विस्तार से दिए गए हैं:

जनवरी 2026

  • 20 जनवरी 2026, मंगलवार
    ⏰ 01:06 पी एम से 02:42 ए एम (21 जनवरी)

मार्च 2026

  • 16 मार्च 2026, सोमवार
    ⏰ 05:56 ए एम से 06:30 ए एम
  • 24 मार्च 2026, मंगलवार
    ⏰ 07:04 पी एम से 06:20 ए एम (25 मार्च)

जून 2026

  • 7 जून 2026, रविवार
    ⏰ 02:40 ए एम से 05:23 ए एम
  • 7 जून 2026, रविवार
    ⏰ 05:23 ए एम से 07:55 ए एम

(एक ही दिन में द्विपुष्कर योग दो बार बनना इसे और अधिक विशेष बनाता है)

अगस्त 2026

  • 9 अगस्त 2026, रविवार
    ⏰ 11:04 ए एम से 02:43 पी एम

अक्टूबर 2026

  • 11 अक्टूबर 2026, रविवार
    ⏰ 09:30 पी एम से 10:32 पी एम

दिसम्बर 2026

  • 5 दिसम्बर 2026, शनिवार
    ⏰ 06:59 ए एम से 11:48 ए एम

द्विपुष्कर योग में कौन-से कार्य शुभ माने जाते हैं?

यदि सही उद्देश्य और सकारात्मक सोच के साथ किए जाएं, तो द्विपुष्कर योग में निम्न कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं:

  • नया व्यवसाय शुरू करना
  • निवेश (सोना, चांदी, दीर्घकालीन निवेश)
  • शिक्षा से जुड़े कार्य, परीक्षा फॉर्म भरना
  • आध्यात्मिक कार्य, मंत्र जाप, व्रत
  • दान-पुण्य और सेवा कार्य

इन कार्यों से सकारात्मक ऊर्जा और लाभ कई गुना बढ़ सकता है।


द्विपुष्कर योग में क्या नहीं करना चाहिए?

ज्योतिष के अनुसार, इस योग में निम्न कार्यों से बचना चाहिए, क्योंकि उनका नकारात्मक प्रभाव भी दोहराया जा सकता है:

  • उधार लेना या देना
  • विवाद, मुकदमे या झगड़े शुरू करना
  • नौकरी छोड़ना बिना ठोस योजना के
  • नकारात्मक निर्णय या जल्दबाजी
  • रिश्तों में टकराव पैदा करना

ऐसा माना जाता है कि इन कार्यों से समस्याएं बार-बार सामने आ सकती हैं


द्विपुष्कर योग और पुष्कर योग में अंतर

योगप्रभाव
पुष्कर योगकार्य का फल कई गुना बढ़ाता है
द्विपुष्कर योगफल दोहराता है (अच्छा या बुरा)
त्रिपुष्कर योगफल तीन गुना या बार-बार देता है

इसलिए द्विपुष्कर योग में सकारात्मक कर्म करना और नकारात्मक कार्यों से दूर रहना अत्यंत आवश्यक है।


निष्कर्ष

द्विपुष्कर योग 2026 एक शक्तिशाली लेकिन संवेदनशील योग है। यह योग जहां शुभ कार्यों में दोगुना लाभ दे सकता है, वहीं गलत निर्णयों को भी दोहराने की क्षमता रखता है। इसलिए इस योग में कोई भी कार्य शुरू करने से पहले पंचांग, समय और उद्देश्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

टिप्पणी (महत्वपूर्ण सूचना)

  • सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में दर्शाए गए हैं
  • समय नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समयानुसार है
  • आधी रात के बाद के समय को आगामी दिन से प्रत्यय कर दर्शाया गया है
  • पंचांग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और अगले दिन सूर्योदय पर समाप्त होता है

Harshvardhan Mishra

Harshvardhan Mishra is a tech expert with a B.Tech in IT and a PG Diploma in IoT from CDAC. With 6+ years of Industrial experience, he runs HVM Smart Solutions, offering IT, IoT, and financial services. A passionate UPSC aspirant and researcher, he has deep knowledge of finance, economics, geopolitics, history, and Indian culture. With 11+ years of blogging experience, he creates insightful content on BharatArticles.com, blending tech, history, and culture to inform and empower readers.

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