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खरमास क्या है? खरमास का महत्व, नियम और क्या करें–क्या न करें

खरमास सनातन धर्म में एक विशेष काल माना जाता है, जिसे अशुभ नहीं बल्कि संयम और साधना का समय कहा गया है। यह वह अवधि होती है जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इस दौरान शुभ मांगलिक कार्यों पर रोक लगाई जाती है, लेकिन धार्मिक साधना, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।


खरमास क्या होता है?

जब सूर्य देव धनु राशि (धनु संक्रांति) या मीन राशि (मीन संक्रांति) में प्रवेश करते हैं, तब से खरमास की शुरुआत होती है।
यह अवधि लगभग 30 दिनों की होती है।

  • धनु खरमास: दिसंबर–जनवरी
  • मीन खरमास: फरवरी–मार्च

इसी कारण वर्ष में दो बार खरमास आता है।


खरमास का धार्मिक महत्व

खरमास को शास्त्रों में संयम, तप और भक्ति का समय बताया गया है। मान्यता है कि इस काल में सूर्य देव की गति धीमी होती है, इसलिए वैवाहिक और शुभ संस्कार स्थगित रखे जाते हैं।

हालांकि यह काल अशुभ नहीं है, बल्कि—

  • आत्मचिंतन
  • भजन-कीर्तन
  • जप-तप
  • दान-पुण्य

के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।


खरमास में कौन-से कार्य वर्जित माने जाते हैं?

शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार खरमास में निम्न कार्य नहीं किए जाते—

  • विवाह संस्कार
  • गृह प्रवेश
  • मुंडन संस्कार
  • नामकरण संस्कार
  • भूमि पूजन
  • नया व्यापार या बड़ा निवेश

इन कार्यों को खरमास समाप्त होने के बाद करना शुभ माना जाता है।


खरमास में क्या करना चाहिए?

खरमास को केवल “रोक का समय” मानना गलत है। इस दौरान निम्न कार्य अत्यंत पुण्यकारी होते हैं—

1. दान-पुण्य

  • अन्न दान
  • वस्त्र दान
  • तिल, गुड़, घी, कंबल का दान
  • निर्धन और असहाय लोगों की सेवा

2. पूजा-पाठ और साधना

  • विष्णु भगवान की उपासना
  • सूर्य देव की आराधना
  • गीता पाठ
  • विष्णु सहस्रनाम
  • हनुमान चालीसा

3. संयमित जीवन

  • सात्विक भोजन
  • क्रोध और अहंकार से दूर रहना
  • सत्य और धर्म का पालन

खरमास और मकर संक्रांति का संबंध

खरमास का समापन मकर संक्रांति के दिन होता है, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण प्रारंभ होता है।
मकर संक्रांति के साथ ही—

  • शुभ कार्य पुनः आरंभ हो जाते हैं
  • विवाह और मांगलिक संस्कार किए जाते हैं
  • शुभ मुहूर्त वापस आते हैं

इसलिए खरमास को नई शुरुआत की तैयारी का समय भी कहा जाता है।


खरमास का आध्यात्मिक संदेश

खरमास हमें यह सिखाता है कि—

  • जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों का नाम नहीं
  • संयम और आत्मशुद्धि भी उतनी ही आवश्यक है
  • हर समय कर्म नहीं, कभी-कभी रुककर आत्मचिंतन भी जरूरी है

यह काल मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने का अवसर देता है।


प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: खरमास कितने दिनों का होता है?
उत्तर: खरमास लगभग 30 दिनों का होता है।

प्रश्न: क्या खरमास अशुभ होता है?
उत्तर: नहीं, खरमास अशुभ नहीं बल्कि साधना और संयम का काल है।

प्रश्न: खरमास में कौन-से कार्य करने चाहिए?
उत्तर: दान, पूजा, जप-तप और सेवा कार्य करने चाहिए।

प्रश्न: खरमास कब समाप्त होता है?
उत्तर: मकर संक्रांति के दिन खरमास समाप्त होता है।


निष्कर्ष

खरमास को केवल “शुभ कार्यों पर रोक” के रूप में देखना उचित नहीं है। यह काल आत्मिक शुद्धि, भक्ति और पुण्य अर्जन का श्रेष्ठ अवसर है।
जो व्यक्ति इस समय का सही उपयोग करता है, उसके जीवन में मकर संक्रांति के बाद सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।

Harshvardhan Mishra

Harshvardhan Mishra is a tech expert with a B.Tech in IT and a PG Diploma in IoT from CDAC. With 6+ years of Industrial experience, he runs HVM Smart Solutions, offering IT, IoT, and financial services. A passionate UPSC aspirant and researcher, he has deep knowledge of finance, economics, geopolitics, history, and Indian culture. With 11+ years of blogging experience, he creates insightful content on BharatArticles.com, blending tech, history, and culture to inform and empower readers.

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