वसंत पंचमी (Basant Panchami / Vasant Panchami) भारत का एक प्रमुख और शुभ पर्व है, जो ऋतु परिवर्तन यानी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। यह पर्व माँ सरस्वती—ज्ञान, बुद्धि, विद्या, कला और संस्कृति की देवी—को समर्पित होता है। इस दिन वातावरण में उल्लास, सकारात्मकता और सीखने की भावना दिखाई देती है।
लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, जो पंजाब और हरियाणा के सरसों के लहलहाते खेतों का प्रतीक माने जाते हैं। बच्चों के लिए यह दिन विशेष होता है, क्योंकि कई स्थानों पर उन्हें पहली बार अक्षर-ज्ञान (विद्यारंभ) कराया जाता है।
इस लेख में वसंत पंचमी 2026 की तिथि, सरस्वती पूजा मुहूर्त, इतिहास, महत्व और राज्यवार परंपराओं की विस्तृत जानकारी दी गई है।
Vasant Panchami 2026: तिथि और समय
वर्ष 2026 में वसंत पंचमी का पर्व शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।
पंचमी तिथि
- पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026, प्रातः 02:28 बजे
- पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026, प्रातः 01:46 बजे
सरस्वती पूजा मुहूर्त (Vasant Panchami Saraswati Puja Muhurat 2026)
| कार्यक्रम | तिथि और समय |
|---|---|
| वसंत पंचमी | शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 |
| सरस्वती पूजा मुहूर्त | 07:15 AM से 12:50 PM |
| कुल अवधि | 05 घंटे 36 मिनट |
| मध्याह्न क्षण | 12:50 PM |
| पंचमी तिथि प्रारंभ | 02:28 AM (23 जनवरी 2026) |
| पंचमी तिथि समाप्त | 01:46 AM (24 जनवरी 2026) |
वसंत पंचमी का इतिहास
वसंत पंचमी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। परंपरागत रूप से यह पर्व माँ सरस्वती से जुड़ा है, जिन्हें ब्रह्मा की अर्धांगिनी और ज्ञान, कला एवं संगीत की देवी माना जाता है।
एक अन्य प्रसिद्ध कथा के अनुसार, कामदेव ने भगवान शिव को तपस्या से जागृत कर पारिवारिक जीवन की ओर प्रेरित किया। देवी पार्वती के आग्रह पर कामदेव ने पुष्प-बाण चलाया, जिससे शिव क्रोधित हुए और उन्होंने कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में रति की कठोर तपस्या से कामदेव को पुनः जीवन मिला। यह कथा वैराग्य से गृहस्थ जीवन की ओर लौटने का प्रतीक मानी जाती है।
वसंत पंचमी का महत्व
भारत में पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और जीवन-मूल्यों का उत्सव होते हैं। वसंत पंचमी भी ऐसा ही पर्व है, जो नई ऊर्जा, नई सोच और नए आरंभ का प्रतीक है।
- दक्षिण भारत में इसे श्री पंचमी
- पूर्वी भारत में सरस्वती पूजा
- उत्तर भारत में वसंत पंचमी
के नाम से जाना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। वसंत पंचमी के बाद लगभग 40 दिनों तक वसंत उत्सव चलता है, जिसके बाद होली आती है।
वसंत पंचमी के आराध्य देव
वसंत पंचमी माँ सरस्वती को समर्पित पर्व है। वे ज्ञान, भाषा, संगीत, कला, शुद्धता और सृजनात्मक शक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं। इसी कारण इस दिन विद्यार्थी, कलाकार, लेखक और संगीतज्ञ विशेष पूजा करते हैं।
वसंत पंचमी कैसे मनाई जाती है
वसंत पंचमी पर सामान्यतः निम्न परंपराएँ निभाई जाती हैं:
- घरों में सरस्वती पूजा
- पीले या सफेद वस्त्र धारण करना
- पतंग उड़ाना
- बच्चों का विद्यारंभ संस्कार
- स्कूलों और कॉलेजों में सामूहिक पूजा
- नए कार्यों और शैक्षणिक संस्थानों की शुरुआत
- पितरों के लिए पितृ तर्पण
राज्यवार वसंत पंचमी उत्सव
ब्रज क्षेत्र (मथुरा–वृंदावन)
यहाँ वसंत पंचमी से ही होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है। मंदिरों में पीले फूलों से सजावट होती है और ठाकुर जी को पीत वस्त्र पहनाए जाते हैं। वृंदावन के प्रसिद्ध मंदिरों में अबीर-गुलाल उड़ाया जाता है।
पंजाब और हरियाणा
यहाँ पतंगबाजी मुख्य आकर्षण होती है। घरों में मीठे चावल, मक्के की रोटी और सरसों का साग बनाया जाता है।
ओडिशा
ओडिशा में लोग मंदिरों में माँ सरस्वती को पीले रंग के ताजे फूल अर्पित करते हैं।
पश्चिम बंगाल
यहाँ यह पर्व सरस्वती पूजा के रूप में बड़े स्तर पर मनाया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और घरों में पूजा होती है। महिलाएँ पीली साड़ी और पुरुष पीले धोती-कुर्ते पहनते हैं। राजभोग और पायेश जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।
निष्कर्ष
वसंत पंचमी 2026 न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह ज्ञान, प्रकृति और नए आरंभ का उत्सव भी है। यह दिन हमें सिखाता है कि सीखना जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है और ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है।
माँ सरस्वती की कृपा से यह वसंत पंचमी आपके जीवन में बुद्धि, सफलता और शांति लेकर आए।



