रवि पुष्य योग क्या है?
रवि पुष्य योग को हिंदू ज्योतिष में अत्यंत शुभ और दुर्लभ योग माना जाता है। यह योग तब बनता है जब रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग होता है।
यह संयोग सूर्य (रवि) की ऊर्जा और पुष्य नक्षत्र की स्थिरता को एक साथ लाता है, इसलिए इसे सर्वश्रेष्ठ शुभ योगों में गिना जाता है।
मान्यता है कि रवि पुष्य योग में किए गए कार्यों में:
- सफलता की संभावना बढ़ जाती है
- धन, व्यापार और संपत्ति में वृद्धि होती है
- बिना विशेष मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं
इसी कारण इसे सर्वसिद्ध योग के समान माना जाता है।
रवि पुष्य योग का ज्योतिषीय महत्व
रवि पुष्य योग का महत्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि:
- पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है
- रविवार सूर्य का दिन होता है, जो आत्मबल और नेतृत्व का कारक है
- यह योग स्थायित्व, उन्नति और दीर्घकालीन लाभ प्रदान करता है
ज्योतिष शास्त्रों में कहा गया है कि इस योग में शुरू किए गए कार्य बार-बार उन्नति की ओर ले जाते हैं।
रवि पुष्य योग 2026: तिथि और समय की पूरी सूची
नीचे वर्ष 2026 में पड़ने वाले सभी रवि पुष्य योग के दिन और समय दिए गए हैं:
जनवरी 2026
- 4 जनवरी 2026, रविवार
⏰ 03:11 पी एम से 07:15 ए एम (5 जनवरी)
फरवरी 2026
- 1 फरवरी 2026, रविवार
⏰ 07:09 ए एम से 11:58 पी एम
मार्च 2026
- 1 मार्च 2026, रविवार
⏰ 06:46 ए एम से 08:34 ए एम
अक्टूबर 2026
- 4 अक्टूबर 2026, रविवार
⏰ 12:13 ए एम से 06:16 ए एम (5 अक्टूबर)
नवम्बर 2026
- 1 नवम्बर 2026, रविवार
⏰ 06:33 ए एम से 04:30 ए एम (2 नवम्बर) - 29 नवम्बर 2026, रविवार
⏰ 06:55 ए एम से 10:59 ए एम
रवि पुष्य योग में कौन-से कार्य शुभ माने जाते हैं?
रवि पुष्य योग को बिना मुहूर्त का योग भी कहा जाता है। इस दौरान निम्न कार्य विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:
- सोना-चांदी और आभूषण की खरीद
- नया व्यापार या दुकान की शुरुआत
- नौकरी जॉइन करना या प्रमोशन से जुड़े कार्य
- भूमि, मकान, वाहन की खरीद
- निवेश (दीर्घकालीन)
- धार्मिक कार्य, दान-पुण्य
इस योग में किए गए कार्य स्थिर और लाभकारी माने जाते हैं।
रवि पुष्य योग में क्या नहीं करना चाहिए?
हालांकि यह अत्यंत शुभ योग है, फिर भी ज्योतिषाचार्य कुछ सावधानियां बताते हैं:
- बिना सोच-समझे उधार देना
- क्रोध या अहंकार में निर्णय लेना
- नकारात्मक विवाद या झगड़े शुरू करना
सकारात्मक सोच और शुभ उद्देश्य के साथ किया गया कार्य ही सर्वोत्तम फल देता है।
रवि पुष्य योग और गुरु पुष्य योग में अंतर
| योग | विशेषता |
|---|---|
| रवि पुष्य योग | रविवार + पुष्य नक्षत्र |
| गुरु पुष्य योग | गुरुवार + पुष्य नक्षत्र |
| दोनों | अत्यंत शुभ और सर्वसिद्ध योग |
दोनों ही योगों में खरीदारी और नए कार्य करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
निष्कर्ष
रवि पुष्य योग 2026 पूरे वर्ष में कुछ ही बार बन रहा है, लेकिन हर बार यह योग उन्नति, स्थायित्व और समृद्धि के लिए अत्यंत अनुकूल है। यदि आप किसी बड़े निर्णय, निवेश या नए कार्य की योजना बना रहे हैं, तो रवि पुष्य योग का समय आपके लिए श्रेष्ठ अवसर हो सकता है।
टिप्पणी (महत्वपूर्ण सूचना)
- सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में दर्शाए गए हैं
- समय नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समयानुसार है
- आधी रात के बाद के समय को आगामी दिन से प्रत्यय कर दर्शाया गया है
- पंचांग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और अगले दिन सूर्योदय पर समाप्त होता है





