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समास – हिंदी व्याकरण में अर्थ, प्रकार और संपूर्ण मार्गदर्शिका

हिंदी व्याकरण में समास एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय है। प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर विद्यालयी पढ़ाई तक, समास का ज्ञान भाषा को सरल, प्रभावी और सुंदर बनाता है। समास के माध्यम से दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया संक्षिप्त और अर्थपूर्ण शब्द बनाया जाता है।


समास का अर्थ क्या है?

समास शब्द का शाब्दिक अर्थ है – संक्षेप करना या मिलाना

जब दो शब्दों के बीच आने वाले कारक चिह्न, विभक्ति या संबंध सूचक शब्दों को हटाकर उन्हें जोड़ दिया जाता है, तब जो नया शब्द बनता है, उसे समास कहते हैं।

उदाहरण:

  • राजा का पुत्र → राजपुत्र
  • घोड़े पर सवार → घुड़सवार
  • माता और पिता → माता-पिता

इन उदाहरणों में दो शब्द मिलकर एक नया शब्द बना रहे हैं—यही समास की प्रक्रिया है।


समास के प्रमुख अंग

समास को समझने के लिए उसके अंग जानना जरूरी हैं:

1. समस्त पद

समास प्रक्रिया के बाद बना हुआ नया शब्द समस्त पद कहलाता है।

जैसे:

  • राजपुत्र, देशभक्ति, नीलकमल

2. पूर्वपद

समास में जो पहला शब्द होता है, उसे पूर्वपद कहते हैं।

  • राज + पुत्र → यहाँ “राज” पूर्वपद है

3. उत्तरपद

समास का दूसरा शब्द उत्तरपद कहलाता है।

  • राज + पुत्र → “पुत्र” उत्तरपद है

4. विग्रह

समस्त पद को दोबारा अलग-अलग करके समझाना समास-विग्रह कहलाता है।

  • राजपुत्र → राजा का पुत्र

समास के प्रकार

हिंदी व्याकरण में समास मुख्य रूप से 6 प्रकार के माने जाते हैं:


1. तत्पुरुष समास

इस समास में उत्तरपद प्रधान होता है और पूर्वपद गौण होता है। इसमें कारक चिह्नों का लोप हो जाता है।

उदाहरण:

समस्त पदसमास विग्रह
देशभक्तिदेश के लिए भक्ति
राजदरबारराजा का दरबार
जलधाराजल की धारा
ग्रामवासग्राम में वास

तत्पुरुष समास के भी कई उपभेद होते हैं जैसे—कर्म तत्पुरुष, करण तत्पुरुष आदि।


2. कर्मधारय समास

यह तत्पुरुष का ही एक भेद है, जिसमें विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध होता है।

उदाहरण:

  • नीलकमल → नीला है जो कमल
  • महापुरुष → महान है जो पुरुष
  • पीतांबर → पीला है जो अंबर

3. द्वंद्व समास

इस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और उनके बीच “और” शब्द का लोप रहता है।

उदाहरण:

समस्त पदविग्रह
माता-पितामाता और पिता
भाई-बहनभाई और बहन
सुख-दुखसुख और दुख
दिन-रातदिन और रात

4. बहुव्रीहि समास

इसमें कोई भी पद प्रधान नहीं होता। पूरा समस्त पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करता है।

उदाहरण:

  • नीलकंठ → नीला है कंठ जिसका (शिव)
  • दशानन → दस हैं आनन जिसके (रावण)
  • लंबोदर → लंबा है उदर जिसका (गणेश)

5. अव्ययीभाव समास

इस समास में पूर्वपद प्रधान होता है और पहला शब्द अव्यय (जैसे-प्रति, यथा, भर, आ आदि) होता है।

उदाहरण:

समस्त पदविग्रह
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
प्रतिदिनहर दिन
आजीवनजीवन भर
भरपेटपेट भर

6. दिगु समास

इसमें पहला पद संख्या वाचक होता है और समूह का बोध कराता है।

उदाहरण:

  • पंचवटी → पाँच वटों का समूह
  • सप्तऋषि → सात ऋषियों का समूह
  • त्रिलोक → तीन लोकों का समूह

समास और संधि में अंतर

कई बार लोग समास और संधि को एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं:

आधारसमाससंधि
प्रक्रियाशब्दों का मेलवर्णों का मेल
अर्थअर्थ के स्तर पर जोड़ध्वनि/वर्ण स्तर पर जोड़
उदाहरणराज + पुत्रविद्या + आलय

समास का महत्व

समास हिंदी भाषा को:

  • संक्षिप्त बनाता है
  • प्रभावी बनाता है
  • शब्द भंडार बढ़ाता है
  • लेखन को आकर्षक और प्रवाहपूर्ण बनाता है

निष्कर्ष

समास हिंदी व्याकरण का वह उपकरण है जो भाषा को सरल और सटीक बनाता है। इसके सभी प्रकारों को समझकर हम हिंदी के कठिन वाक्यों को एक शब्द में व्यक्त कर सकते हैं।

Harshvardhan Mishra

Harshvardhan Mishra is a tech expert with a B.Tech in IT and a PG Diploma in IoT from CDAC. With 6+ years of Industrial experience, he runs HVM Smart Solutions, offering IT, IoT, and financial services. A passionate UPSC aspirant and researcher, he has deep knowledge of finance, economics, geopolitics, history, and Indian culture. With 11+ years of blogging experience, he creates insightful content on BharatArticles.com, blending tech, history, and culture to inform and empower readers.

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